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Shree R K Homoeopathy Hospital-Dr. Rajneesh Jain

 

Here’s a summary of Dr. Rajneesh Jain’s work and the latest blog content from Shree R K Homoeopathy Hospital:


🧑‍⚕️ Dr. Rajneesh Jain – Healing Through Homeopathy

  • Founder of Shree R K Homoeopathy Hospital and Mamata Sewa Sansthan NGO
  • Over 20 years of experience in treating chronic and acute illnesses
  • Known for digital homeopathy, rural outreach, and holistic healing
  • Offers personalized care for:
    • Allergies, skin conditions, respiratory issues
    • Digestive problems, infections, and pain management
    • Pediatric, geriatric, and women’s health

📝 Latest Blog Highlights

Here are some recent articles authored by Dr. Jain:

1. मुँह में पानी से भरे फफोले: कारण और होम्योपैथिक समाधान

  • Explores causes of fluid-filled blisters in the mouth
  • Offers homeopathic remedies for quick relief
  • Emphasizes early detection and root-cause treatment

2. सफेद रोंग में चमत्कारी राहत – 10 दिन में आराम

  • Case study of a patient from Khadgada who recovered from leukoderma in just 10 days
  • Showcases the effectiveness of customized homeopathic treatment

3. छाले के दर्द से मुक्ति – 5 आसान तरीके

  • Tips to relieve painful mouth ulcers using homeopathy
  • Includes a case where a patient regained normal eating and speaking ability in 5 days

📍 Location & Contact




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चिरकालिक कब्ज: कारण, प्रकार और होम्योपैथिक उपचार-Dr. Rajneesh Jain

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हर्निया: कारण, लक्षण और होम्योपैथिक उपचार- Dr.Rajneesh Jain

  हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक आंतरिक अंग या ऊतक, जो सामान्य रूप से अपने स्थान पर रहता है, शरीर के किसी कमजोर या असामान्य स्थान से बाहर निकल आता है। यह अक्सर पेट की दीवार की कमजोरी या फटी हुई मांसपेशियों के कारण होता है। हर्निया के लक्षणों में एक उभार या फूला हुआ हिस्सा, दर्द, और प्रभावित क्षेत्र में असुविधा शामिल हो सकते हैं। हर्निया कई कारणों से हो सकता है। यहां कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं: भारी वस्तु उठाना (Lifting heavy objects): अचानक या लगातार भारी वस्तुएं उठाने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे हर्निया हो सकता है। कब्ज (Constipation): बार-बार कब्ज होने से मल त्याग के समय अधिक दबाव डालना पड़ता है, जिससे हर्निया का जोखिम बढ़ जाता है। खाँसी या छींक (Chronic cough or sneezing): लगातार खाँसी या छींक आने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। मोटापा (Obesity): अत्यधिक वजन भी हर्निया के जोखिम को बढ़ा सकता है, क्योंकि यह पेट की मांसपेशियों पर अधिक दबाव डालता है। पिछली सर्जरी (Previous surgery): पेट की पिछली सर्जरी के बाद का निशान कमजोर हो सकता है, जिससे हर्निया हो ...